कैंची धाम एक ऐसी जगह है जो सभी पर्यटको को आकर्षित करती है यहाँ पर एक महान संत जिसको नीम करोली बाबा के नाम से जाना जाता है मंदिर की इतनी मान्यता है यहाँ पर बड़े बड़े दिग्गज नेता से लेकर अभिनेता तक आये हुए है नीम करोली बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कुछ भी मनोकामना मांगता है श्रद्धालु की वह इच्छा पूर्ण हो जाती है यह आज के युग में एक ऐसा धाम बन गया है जो श्रद्धालु को यहाँ पर आने के लिए बार-बार आकर्षित करता है नीम करोली बाबा के भक्त भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी है जैसे स्टीव जॉब्स ,मार्क जुकरबर्गर यहाँ पर आ चुके है उनका मानना यह है यहाँ आने के बाद हमें काम के प्रति और उसको करने में एक आंतरिक शक्ति का आभास हुआ इस जगह के आपको ऐसे कई अनोखे किस्से सुनने को मिल जायेंगे मंदिर में आपको बाबा नीम करोली
व माँ वैष्णव की एक दिव्ये प्रर्तिमा बनाई गई जो पर्यटको को आकर्षित है रात के समय मंदिर मे दोनों मूर्तियों की चमक अलग दिखाई देती है यह नज़ारा और भी देखने लायक है मंदिर के चारो और चीड़ के ऊँचे-ऊँचे पेड़ो व पहाड़ो से घिरा हुआ है जो मंदिर और प्रकृति दोनी ही इस जगह के चार चाँद लगा देते है मंदिर की स्थापना 1965 में हुई नीम करोली बाबा यहाँ पर 1964 में पहली बार नैनीताल में आये थे उनका जन्म 1900 में हुआ था अकबरपुर जो उत्तरप्रदेश में है उनका नाम नीम करोली बाबा ऐसे पड़ा वह ट्रेन में सफर कर रहे थे उनके पास टिकट ना होने पर उनको अगले स्टेशन पर उतरने को कहा और जिस स्टेशन पर बाबा जी उतरे थे उस स्टेशन का नीम कैरोली था और बाबा एक नीम के पेड़
के निचे बैठ गए फिर ट्रेन एक कदम भी हिली नहीं कई बार प्रयास करने के बावजूद भी बाद में हाथ जोड़कर नीम करोली बाब जी से माफी मांगी उनको ट्रैन में बिठाया तब ट्रैन आगे चली इस चमत्कार से इस संत का नीम करोली वाले बाबा पड़ा इस जगह उनके मित्र और नीम करोली बाबा जी ने मंदिर बनाया हनुमान जी का जो आज भी आपको देखने को मिल जायेगा नीम करोली बाबा का वैसे नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा 17 साल की उन्होंने घर को त्याग दिया था नीम करोली बाबा जिस भी जगह पर जाते थे लोग उनका चमत्कार देखकर उस जगह के नाम से जाने जाते थे ऐसे उनका भारत में कई जगह पर मंदिर देखने को मिल जायेंगे और उनकी मृत्यु वृन्दावन में हुई थी 1973 को नीम करोली बाबा हमेसा एक कम्बल ( खेसि ) ओढ़ा करते थे और श्रद्धालु उनको कम्बल भी भेंट करते है आज भी समाधी पर यह यहाँ की आस्था और श्रद्धा है नीम करोली बाबा के प्रति श्रद्धालुओ की और मंदिर में आपको चारो और धीमी ध्वनि सुनाई देगी नीम करोली बाबा की जिससे आपको मन की शांति का अलग ही अनुभव होगा ,मंदिर के खुलने का समय सुबह 5 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक खुला रहता है
यहाँ आने के लिए सबसे पहले आपको अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे पर आना पड़ेगा फिर आगे के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन जो हल्द्वानी जिले में पड़ता है जिसकी दुरी मंदिर से 37 किमी है और हवाई अड्डा जो पंतनगर में है जिसकी दुरी मंदिर से 66 किमी और यह उधम सिंह नगर जिले में है यहाँ पर दर्शन के लिए आप साल में कभी भी आ सकते हो लेकिन मानसून के दौरान आप सावधानी के साथ ही आये या आप बस माध्यम से भी आ सकते है भारत की राजधानी दिल्लीं से नैनीताल की दुरी 391 किमी है जो नैनताल से 20 किमी दूर है यहाँ से आपको मंदिर जाने के लिए टैक्सी कार अन्य वाहन मिल जायेंगे व रहने के लिए आपको यहाँ पर होटल ,लॉज की सुविधा भी मिल जाएगी