कुमाऊं मंडल के छह शहर में सबसे प्रसिद्ध माने जाने वाला शहर है नैनीताल, जिसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। कुमाऊं की तलहटी में बसा यह स्थान देहरादून से 279 किमी व दिल्ली से 324 किमी की दूरी पर है। प्रकृति के अद्भुत नज़ारे पेश करने वाले इस स्थान पर आप सड़क, रेल तथा हवाई मार्ग से आ सकते है। यहाँ स्थित सुप्रसिद्ध नैनी झील की खूबसूरती देखते ही बनती है जिसमे रंग बिरंगी नाव इसकी खूबसूरती को और मनमोहक बना देते है। बेहद ही आकर्षित करने वाली
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कुमाऊं मंडल के छह शहर में सबसे प्रसिद्ध माने जाने वाला शहर है नैनीताल, जिसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। कुमाऊं की तलहटी में बसा यह स्थान देहरादून से 279 किमी व दिल्ली से 324 किमी की दूरी पर है। प्रकृति के अद्भुत नज़ारे पेश करने वाले इस स्थान पर आप सड़क, रेल तथा हवाई मार्ग से आ सकते है। यहाँ स्थित सुप्रसिद्ध नैनी झील की खूबसूरती देखते ही बनती है जिसमे रंग बिरंगी नाव इसकी खूबसूरती को और मनमोहक बना देते है। बेहद ही आकर्षित करने वाली 'साथ पहाड़ियों' से घिरे इस स्थान को सप्ता-श्रृंग के नाम से भी जाना जाता है। अपनी खूबसूरती से पर्यटकों
को आकर्षित करने वाले इस स्थान पर हर साल काफी संख्या में श्रद्धालु यहाँ स्थित माँ नैना देवी के दर्शन पाने हेतु आते है। पौराणिक कथा अनुसार जब माता सती के जले हुए शरीर को लेकर भगवान शिव पीड़ा से घूम रहे थे उस दौरान उनकी बाई आँख इस स्थान पर गिर गई थी, जिस वजह से इस मंदिर को 51 शक्ति पीठ में दर्जा प्राप्त है। ध्यान से देखने पर आपको यहाँ स्थित झील आंख के आकार की दिखाई प्रतीत होगी, जिस वजह से इस झील को नैनी झील भी कहा जाता है और नैना देवी मंदिर इस झील के समीप स्थित है यहाँ पर हर साल मेला भी लगता है जो सितम्बर में धूम धाम से मनाया जाता है न्यायिक राजधानी कहलाये जाने वाले इस स्थान में राज्य का प्रथम उच्च न्यायलय भी स्थित है। देश का पहला
नेशनल पार्क, जिम कॉर्बेट नैनीताल में स्थित है, जहाँ काफी संख्या में लोग जंगल सफारी का लुत्फ़ लेने आते है। इस पार्क में आपको बेंगोल टाइगर से लेकर हिरन आदि जानवर देखने को मिलेंगे और अंग्रेजों के शाशनकाल के दौरान ग्रीष्मकालीन राजधानी कहलाये जाने वाले इस स्थान पर आपको उस दौर के खूबसूरत बंगले विरासत के रूप में दिख जाएंगे। अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोये नैनीताल में ख़ास अवसरों पर ग्रामीण लोग अपनी पारम्परिक वेशभूषा धारण किये वाध यंत्रो में थिरकते हुए दिख जाएंगे। वही यहाँ की बाल मिठाई काफी प्रसिद्ध है जिसका खाये बिना पर्यटक यहाँ से जाता नहीं। बोटिंग, कायकिंग, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून एवं ट्रैकिंग जैसे कई रोमांचकारी खेलो का लुत्फ़ पर्यटक यहाँ उठा सकते है। नैनीताल की इस सूंदर झील में आपको प्रकृति की चारो और हरियाली और पहाड़ो का विहंगम नज़ारा जो पर्यटको को अपनी और आकर्षित करती है झील के अंदर आप बोट से घूम सकते हो जिसका शुल्क अलग से देना पड़ता है
इस स्थान से आप घोड़ाखाल, कैची धाम, भीमताल, सातताल झील और मुक्तेश्वर जैसे नाम चीन स्थल पर भी जा सकते है। नैनीताल में आने के लिए अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन या आई एस बीटी बस स्टैंड पर जो उत्तराखण्ड के नैनीताल में जाती हो या आप पन्तनगर के एयर पोर्ट से 70 किलोमीटर पड़ता है नैनीताल या जॉली ग्रांट एयर पोर्ट से भी आ सकते है यात्री इन तीनो जगहों पर पहुँचने पर टैक्सी कार अन्य सुविधा मिल जाएगी आने को यहाँ पर आप वैसे कभी भी घूमने आ सकते हो लेकिन बरशांत (मानसून के समय ) थोड़ा सावधानी के साथ आये दो महीनो में आपको काफी बारिश देखने को मिलेगी