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विश्वनाथ मंदिर

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जानकारी

भगवान शिव को समर्पित विश्वनाथ मंदिर उत्तराखंड के गुप्तकाशी में स्थित है। कहा जाता है की यह वही स्थान है, जहाँ माता पार्वती ने भगवान शिव को विवाह के लिए प्रस्ताव दिया था। भगवान शिव को समर्पित तीन पवित्र काशी मानी जाती हैं, पहली वाराणसी में, जबकि अन्य दो उत्तरकाशी और गुप्तकाशी में हैं। केदारनाथ मंदिर मार्ग में स्थित होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली भी केदारनाथ मंदिर जाने से पहले यहाँ एक रात्रि के लिए विश्राम करती है। इसके अलावा यह मंदिर मणिकर्णिका कुंड के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें गंगा और यमुना की जलधाराएँ आकर मिलती हैं।

विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी

विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव का एक अत्यंत पूजनीय मंदिर है, जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी में स्थित है। केदारनाथ मार्ग पर स्थित यह मंदिर दिल्ली से लगभग 434 किलोमीटर की दूरी पर है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ आप बस और टैक्सी से आ सकते है जिसकी सुविधा आपको हरिद्वार और ऋषिकेश से आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
 

पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला में निर्मित यह मंदिर केदारनाथ मंदिर की शैली से मिलता-जुलता है। हालाँकि मंदिर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन यहाँ का शांत और आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत अद्भुत है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक दिव्य शक्ति की अनुभूति होती है, जो मन को शांति और स्थिरता प्रदान करती है। मंदिर के द्वार के ऊपर भगवान शिव के उग्र स्वरूप भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है। यहाँ आने वाले कई श्रद्धालु मंदिर के पुजारी द्वारा विशेष पूजा भी करवाते हैं। एक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण होने के बाद भक्त अपनी दक्षिणा नारियल के भीतर छिपाकर अर्पित करते हैं।

विश्वनाथ मंदिर का महत्व

पौराणिक कथा अनुसार इसी स्थान पर देवी पार्वती ने भगवान शिव के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद दोनों का विवाह यहाँ से 38 किमी दूर स्थित त्रियुगीनारयण मंदिर में हुआ था। इसी के चलते त्रियुगीनारयण मंदिर आजकल डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए काफी प्रसिद्ध है और काफी संख्या में युवा यहाँ शादी के बंधन में बंधने के लिए आते है। मंदिर के बगल में ही आपको भगवान शिव और माँ पार्वती का स्वरुप देखने को मिलता है, जिसे अर्धनारीश्वर कहते है।
 

इसके अतिरिक्त यह स्थान पांडवो से भी जुड़ा माना जाता है। मान्यता है की महाभारत युद्ध के पश्चात पांडव अपने पापो के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की खोज में निकले थे। लेकिन पांडवो से नाराज भगवान शिव गुप्तकाशी के निकट एक स्थान पर बैल का रूप धारण करके छुपे हुए थे। शिव को खोजते-खोजते जब पांडव गुप्तकाशी पहुंचे तो पाण्डु पुत्र भीम ने शिव को पहचान लिया। इसके बाद भगवान शिव ने पांडवो को पंच केदार के रूप में पांच अलग-अलग स्थानों पर दर्शन दिए।

विश्वनाथ मंदिर का मणिकर्णिका कुंड

गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर अपने अनेक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, जिनमे से एक है इसका मणिकर्णिका कुंडा। इस कुंड की खासियत है कि इसमें बहती हैं दो जलधाराएँ, जिन्हें गौमुख और हथनीमुख के नाम से जाना जाता है। कहते है गौमुख से निकलने वाली जलधारा गंगा की है, तो वहीं हथनी मुख से निकलने वाली जलधारा यमुना की बताई जाती है।
 

यह भी अपने आप में एक विचित्र बात है की दोनों ही नदियों को उद्गम स्थल यहाँ से मीलो दूर विपरीत दिशा में है। कहते है कुंड में एकत्रित होने वाला दोनों जलधाराओं के पानी एकी कही भी निकासी नहीं ही, इसके बावजूद इस कुंड से पानी न तो कभी बाहर गिरता है और न ही कभी यह कुंड सूखता है।
 

कहा जाता है की इस कुंड में स्नान करने से त्वचा निरोगी हो जाती है इसी के चलते यहाँ आए श्रद्धालु इस कुंड में स्नान अवश्य करके जाते है।

केदारनाथ डोली का पड़ाव

विश्वनाथ मंदिर बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो मंदिर की महत्ता को दर्शाता है। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के दौरान बाबा की डोली कई पड़ाव से होकर गुजरती है, जिनमे से एक विश्वनाथ मंदिर भी है। इस दौरान मंदिर को बेहद ही खूबसूरत ढंग से सजाया जाता है। इस दौरान स्थानीय ग्रामीण एवं अन्य श्रद्धालु काफी संख्या में मंदिर में उपस्थित होकर बाबा केदार की पंचमुखी डोली का स्वागत करने के लिए खड़े रहते है। यह दिन क्षेत्र के निवासियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता, जिसमे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी शामिल होते है।

अर्धनारीश्वर मंदिर

भगवान शिव के इस मंदिर में आपको भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप के भी दर्शन करने को मिलते है। अर्धनारीश्वर का यह मंदिर प्रांगढ़ में स्थित मुख्य मंदिर के बगल मे ही स्थित है। अर्धनारीश्वर भगवान शिवा का एक रूप में है, जो की शिव और माँ पार्वती से बना है। यह दिव्य स्वरुप इस संसार में पुरुष और स्त्री की ऊर्जा को दर्शाता है।

निवास की सुविधा

मंदिर के पास ठहरने के लिए कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बुक किया जा सकता है। यहाँ मुख्य रूप से होटल और होमस्टे के विकल्प मिलते हैं। इसके अलावा, मंदिर परिसर में एक धर्मशाला भी उपलब्ध है, जहाँ श्रद्धालु रात में ठहरने की व्यवस्था कर सकते हैं।

खाने की व्यवस्था

मंदिर के निकट विभिन्न प्रकार के होटल और ढाबा की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ से श्रद्धालु स्थानीय व्यंजन का स्वाद ले सकते है।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • मंदिर जाने से पहले मौसम की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।
  • यदि संभव हो, तो मानसून के मौसम में यात्रा करने से बचें।
  • बाबा केदारनाथ की डोली का रात्रि विश्राम होने के चलते मंदिर में उस दौरान काफी भीड़ देखने को मिलती है।
  • चार धाम यात्रा के के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है।
  • यदि आप रात में ठहरने की योजना बना रहे हैं, तो पहले से ही आवास की बुकिंग कर कर लें, अंतिम समय में परेशानी हो सकती है।
  • गर्मियों में भी यहाँ का मौसम ठंडा रहता है, इसलिए गर्म कपडे साथ रखें।
  • गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है।
  • यदि आप कुंड में स्नान करना चाहते हैं, तो अपने साथ अतिरिक्त कपड़े और तौलिया अवश्य रखें।
  • कुंड में स्नान करने के बाद मंदिर परिसर में ही चेंजिंग रूम की सुविधा मिल जाती है।
  • मंदिर में प्रसाद चढाने के लिए आपको बहार उचित मात्रा में प्रसाद की दुकाने मिल जाएंगी।
  • मंदिर के बाहर सीमित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है।
  • बस और टैक्सी मंदिर के लिए सुबह जल्दी निकलती है इसलिए स्टेशन समय से पहले पहुंचे।
  • मंदिर परिसर में मौजूद धर्मशाला में रहने की उचित सुविधा श्रद्धालुओ को मिल जाती है।

नजदीकी आकर्षण

विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के साथ-साथ आप आसपास के इन प्रमुख स्थानों की भी यात्रा कर सकते हैं

यहां कैसे पहुंचे

सड़क मार्ग से: - गुप्तकाशी में स्थित विश्वनाथ मंदिर ऋषिकेश से लगभग 177 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यात्री ऋषिकेश बस स्टैंड से उपलब्ध बस या साझा टैक्सी (शेयर टैक्सी) के माध्यम से मंदिर तक पहुँच सकते हैं। इसके अलावा देहरादून और हरिद्वार बस स्टैंड से भी बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।
 

रेल मार्ग से: - मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 178 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्टेशन की दिल्ली से सीमित रेल कनेक्टिविटी है। स्टेशन पर पहुँचने के बाद यात्री अपनी आगे की यात्रा बस या टैक्सी के माध्यम से जारी रख सकते हैं।
 

हवाई मार्ग से: - निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 192 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा देश के प्रमुख शहरों, विशेष रूप से दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और बैंगलोर से सीधी उड़ानों के माध्यम से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से यात्रियों को सबसे पहले ऋषिकेश पहुँचना होता है, जो यहाँ से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। ऋषिकेश से श्रद्धालु बस या टैक्सी के माध्यम से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम

विश्वनाथ मंदिर सालभर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। हालांकि, यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय फरवरी से मई और सितंबर से नवंबर के बीच माना जाता है।

समुद्र तल से ऊँचाई

गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 1,319 मीटर (करीब 4,327 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है।

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