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यमुनोत्री धाम

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जानकारी

उत्तराखंड की पवित्र और प्रसिद्ध चार धाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री धाम से होती है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यह प्राचीन मंदिर माँ यमुना को समर्पित है। चारो तरफ ऊँची पहाड़ियों से घिरा यह मंदिर माँ यमुना का उद्गम स्थल भी है। भारत में गंगा के बाद यमुना नदी की गिनती सबसे पवित्र नदियों में से होती है। कहते है की यमुना में भाई दूज के दिन स्नान करने मात्र से व्यक्ति अकाल मृत्यु से सुरक्षित हो जाता है। भक्तो के लिए यमुनोत्री मंदिर के कपाट साल में केवल छह माह ही खुले रहते है, जो की अक्षय तृतीया के अवसर पर खोले और भाई दूज के दिन बंद किये जाते है। माँ यमुना के प्रति गहरी आस्था और उनके आशीर्वाद पाने के लिए हर साल लाखो की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पधारते है।

यमुनोत्री धाम - चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव

यमुनोत्री धाम उत्तराखंड की चार धाम यात्रा का सबसे पहला पड़ाव है। यमुनोत्री धाम से शुरू होने वाला या यात्रा गंगोत्री धाम, केदारनाथ धाम और अंत में बद्रीनाथ धाम में समाप्त होती है। चार धाम यात्रा के शुरू होते ही हजारो की संख्या में श्रद्धालु रोजाना मंदिर दर्शन करने पहुंचते है। दिल्ली से यमुनोत्री मंदिर करीब 400 किमी की दूरी पर है, जिसे आप सड़क मार्ग से तय कर सकते है। माँ यमुना सूर्य देव की पुत्री है, जिन्हे जीवन दायनी भी कहा जाता है। मंदिर के अंदर माँ यमुना की काले मार्बल से निर्मित मूर्ति बेहद ही आकर्षक और दिव्य दिखाई देती है।

यमुनोत्री धाम की लोकेशन

उत्तरकाशी स्थित यमुनोत्री धाम में श्रद्धालु सड़क मार्ग से पहुँच सकते है। इसके लिए उन्हें देहरादून, ऋषिकेश, और हरिद्वार से परिवहन की सुविधा आसानी से मिल जाती है। देहरादून से मंदिर करीब 170 किमी दूर है, जिसके लिए आपको शहर के पर्वतीय बस डिपो से बस और टैक्सी की सेवा मिल जाती है। यह मोटर मार्ग केवल जानकी चट्टी तक ही उपलब्ध है, इसके आगे का मार्ग आपको पैदल ट्रेक करके पूरी करनी होती है।

यमुनोत्री मंदिर ट्रेक

यमुनोत्री मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से 6 किमी का ट्रेक करना होता है। इस दूरी को तय करने के लिए यहाँ घोड़े, खच्चर और पालकी की सुविधा भी मिल जाती है। मध्यम कठिनाई भरे इस ट्रेक का सफर थका देने वाला होता है, जिसके लिए व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत होना होता है। ट्रेक के दौरान आपको बेहद ही विहंगम नज़ारे देखने को मिलते है, जो आपकी यात्रा का आनंदित बनाए रखते है। जानकी चट्टी से यमुनोत्री धाम तक का यह सफर पूरा करने में करीब 4 घंटे का समय लग जाता है।

मंदिर खुलने और आरती का समय

यमुनोत्री मंदिर रोजाना सुबह 6:00 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है और संध्या आरती के बाद राति 8:00 बजे इसके दरवाजे दर्शन हेतु बंद कर दिए जाते है। श्रद्धालु मंदिर में होने वाली आरती में भी शामिल हो सकते है जो रोजाना सुबह 6:30 बजे और शाम को 7:30 बजे आयोजित होती है। मंदिर में चढाने के लिए यहाँ प्रसाद की दुकाने उचित संख्या में उपलब्ध है, जहाँ से आप मंदिर में मुख्य रूप से चढ़ाए जाने वाला प्रसाद ले सकते है।

सूर्य कुंड और गौरी कुंड

यमुनोत्री धाम के निकट स्थित सूर्य कुंड और गौरी कुंड यहाँ श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करते है। सूर्य कुंड एक गर्म पानी का कुंड है, जिसके गर्म पानी में श्रद्धालु स्नान के साथ चावल और आलू को भी पकाते है। जबकि गौरी कुंड का पानी सूर्य कुंड की अपेक्षा सामान्य होता है और नहाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व श्रद्धालु इन कुंड में स्नान करके ही प्रवेश करते है। चार धाम यात्रा पर कई श्रद्धालु सूर्य कुंड में चावल को पकाकर मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाते है। मंदिर के निकट स्थित दिव्य शिला भी आकर्षण का केंद्र है, जिसकी पूजा मंदिर में प्रवेश करने से पहले की जाती है।

यमुनोत्री धाम का इतिहास

यमुनोत्री धाम स्थित माँ यमुना का मंदिर 19वीं शताब्दी का बताया जाता है। मंदिर का निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया द्वारा किया गया था, जिसका पुनःनिर्माण टिहरी के महाराजा प्रताप शाह द्वारा किया गया। माना जाता है की संज्ञा माँ यमुना की जन्मस्थली है, और इसे माँ यमुना का उद्गम स्थल भी माना जाता है, जो की मंदिर से एक किमी की दूरी पर है। यहाँ स्थित चंपासर ग्लेशियर के समीप स्थित पर्वत को कलिंद पर्वत के नाम से जाना जाता है, जो की माँ यमुना के पिता सूर्य देव को समर्पित है। यमुना के दो भाई यमराज (मृत्यु के देवता) और शनि सूर्यदेव की पत्नी क्रमशा संज्ञा और छाया के पुत्र है।

पौराणिक कथा

यमुनोत्री धाम का पौराणिक इतिहास कई वर्षो पुराना है। कहते है की ऋषि असिता का यहाँ पर एक आश्रम था। वे रोजाना यमुना और गंगा नदी में स्नान करके तप किया करते थे। लेकिन अपने उम्र ढलने के साथ वे यमुना में ही स्नान कर पाते थे और चलने में असमर्थता के चलते वे गंगा में स्नान नहीं कर पा रहे थे। उनकी भक्ति देखकर माँ गंगा की धारा यमुनोत्री मदिर के निकट ही बहने लगी।

प्रतिष्ठित परंपरा

यमुनोत्री धाम यात्रा पर आए श्रद्धालु अक्सर मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व यहाँ स्थित सूर्य कुंड और गौरी कुंड में स्नान करते है। इसके अतिरिक्त कई श्रद्धालु यहाँ के सूर्य कुंड के गर्म पानी में चावल और आलू को उबाल कर मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाते है। बाद में पुजारी जी द्वारा पके हुए चावल और आलू को दर्शन करने आए श्रद्धालुओं में वितरित कर दिया जाता है।

मौसम

दस हजार से भी अधिक की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री धाम का मौसम हमेशा ठंडा रहता है। सुबह और रात के समय यहाँ का तापमान काफी नीचे चला जाता है, जिसके चलते श्रद्धालुओं को गर्मी के मौसम में भी गर्म कपड़ो की आवश्यकता होती है।

निवास की सुविधा

यमुनोत्री धाम आए श्रद्धालुओं को रात्रि विश्राम के लिए जानकी चट्टी में उचित ठहरने की व्यवस्था मिल जाती है। श्रद्धालुओं को यहाँ होटल, होमस्टे व गेस्ट हाउस की सुविधा मिल जाती है, जिन्हे वे अपनी सुविधा अनुसार ऑनलाइन या पहर ऑफलाइन माध्यम से बुक कर सकते है।

खाने की व्यवस्था

यमुनोत्री धाम आए श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी में विभिन्न ढाबे और रेस्टोरेंट की सुविधा मिल जाएगी। यहाँ आए श्रद्धालुओं को मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • चार धाम यात्रा का पंजीकरण सभी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक है।
  • चार धाम यात्रा के पंजीकरण ऑनलाइन या देहरादून, ऋषिकेश या हरिद्वार स्थित काउंटर से कर सकते है।
  • यात्रा से पूर्व मौसम की जानकारी अवश्य से प्राप्त कर लें और आवश्यक ना हो तो मानसून में यात्रा करने से बचे।
  • यात्रा के दौरान अपने साथ पहचान पत्र अवश्य से रखें।
  • उचित मात्रा में कॅश, दवाई और गर्म कपडे साथ लेकर चलें।
  • ट्रेक के दौरान भीड़ से दूर रहे और जल्दबाजी से बचें।
  • ट्रेक करते समय आवश्यक मात्रा में पानी पीते रहे।
  • चढ़ने में असमर्थ है तो यात्री घोड़े खच्चर की सेवा ले सकते है।
  • बुजुर्ग और बीमारी से ग्रसित व्यक्ति यात्रा प्रारम्भ करने से पहले डॉक्टर का परामर्श अवश्य प्राप्त कर लें।
  • अत्यधिक भीड़ के चलते अपने ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लें।
  • जानकी चट्टी में वाहन पार्किंग की उचित व्यवस्था उपलब्ध है।
  • अत्यधिक भीड़ होने के चलते दर्शन हेतु टोकन अवश्य से प्राप्त कर लें।

नजदीकी आकर्षण

माँ यमुना के दर्शन करने के पश्चात श्रद्धालु इसके निकटतम अन्य धार्मिल और पर्यटक स्थल पर भी जा सकते है; जैसे की:

  • जानकी चट्टी
  • खरसाली
  • शनि देव मंदिर
  • हनुमान चट्टी

यहां कैसे पहुंचे

  • यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है, जो देहरादून से 170 किमी की दूरी पर स्थित है।
  • यहाँ आप देहरादून, ऋषिकेश या हरिद्वार से सड़क मार्ग का उपयोग करके आ सकते हैं।
  • इसके लिए आपको देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से बस और टैक्सी की सेवा आसानी से मिल जाती है।
  • ये तीनों ही शहर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और अन्य प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़े हुए हैं।

सड़क मार्ग से: - मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को अपने निकटतम देहरादून, ऋषिकेश या हरिद्वार पहुंचना होगा। यहाँ से यमुनोत्री धाम के लिए सीधी बस सेवा और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। चार धाम यात्रा के दौरान सरकार द्वारा स्पेशल बस सेवा भी संचालित की जाती है।
 

रेल मार्ग से: - मंदिर के निकटतम रेल मार्ग देहरादून रेलवे स्टेशन है, जो की लगभग 170 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से देहरादून रेलवे स्टेशन के लिए रोजाना ट्रैन सेवा संचालित होती है। स्टेशन से आगे की यात्रा श्रद्धालु सड़क मार्ग से पूरी कर सकते है, जिसके लिए उन्हें बस सेवा का लाभ स्टेशन के समीप देहरादून पर्वतीय बस डिपो से मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त श्रद्धालु स्टेशन से कैब सेवा का भी उपयोग कर सकते है।
 

हवाई मार्ग से: - इसके निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो मंदिर से 239 किमी दूर है। एयरपोर्ट से श्रद्धालु ऋषिकेश से अपनी मंदिर तक की यात्रा जारी रख सकते है, जो यहाँ से 16 किमी की दूरी पर है। ऋषिकेश से यमुनोत्री के लिए बस और टैक्सी सेवा आसानी से मिल जाती है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम

यमुनोत्री धाम जाने का सबसे बेहतरीन समय मानसून से पहले और बाद का माना जाता है। क्यूंकि मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश के चलते मार्ग अवरुद्ध और भूस्खलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

समुद्र तल से ऊँचाई

समुद्र तल से यमुनोत्री धाम करीब 3,293 मीटर (10,804 फ़ीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

Nearest Spot Based on Religious - Hinduism

मौसम का पूर्वानुमान

स्थान

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