विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी
जानकारी
विश्वनाथ मंदिर एक भव्य मंदिरो में से एक माना जाता है यह मंदिर उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित और राजधानी देहरादून से 217 किलोमीटर की दुरी पर है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर पाण्डव से जुड़ा हुआ माना जाता है महाभारत युद्ध समाप्त होने के कुछ समय बाद पाण्डव राजपाठ त्याग कर भगवान शिव की तलाश में निकल पड़े हिमालय की और तब भगवान शिव गुप्तकाशी में इस जगह पर तपस्या में लीन थे तभी पाण्डव के आने का आभास हुआ और यहाँ से गुप्त हो गए इस कारण इसका नाम गुप्तकाशी पड़ा पाण्डव से भगवान शिव रुष्ट थे क्योंकि उन पर अपने गुरुजनो और भाइयों का हत्या का पाप लगा हुआ था इसलिए भगवान शिव उनको दर्शन देना नहीं चाहते थे इस मंदिर ठीक सामने केदारनाथ के पहाड़ और वौखम्बा के बर्फीले पहाड़ दिखाई देते है जिस कारण यह मंदिर और भी आकर्षित करता है पर्यटको को मंदिर की एक खास बात यह भी जो बनारस यानि वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर है
इसको भी उसी के समान माना जाता और पूजा अर्चना की जाती है क्योँकि इस मंदिर में ज्योतिर्लिंग आपको ठीक काशी विश्वनाथ मंदिर में जो है वैसा ही दिखाई देगा त्रिकोणे आकार का जिस कारण यह मंदिर प्रशिद्ध मंदिरो में से एक है दूसरा मंदिर के आगे दो मुख्य धाराओं का प्रवाह देखने को मिलेगा जो शिवलिंग के दांये और बाएं तरफ से निकलती है जिनको गंगा और जमुना धारा व मनिककर्णिका कुंड भी कहा जाता है यहाँ के लोगो का मामना है की दोनों धाराओं से शिवलिंग के ऊपर चढाने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मन को एक अलग ही सुख व शांति का अनुभव होता है मंदिर के बगल में माता पार्वती का मंदिर भी है जिसके अंदर आपको माता की एक सुन्दर प्रतिमा के दर्शन करने को मिलेंगे इस मंदिर की बनावट भी आपको केदारनाथ जैसी दिखाई देगी जिसको केदारनाथ का रूप कहा जाता है और यह मंदिर केदारनाथ मार्ग पर पड़ता है रात के समय जगमगाता उखीमठ का सूंदर नज़ारा एक देखने वाला दृश्य है जो
इस जगह के और भी चार चाँद लगा देता है मंदिर के पास नजदीकी घूमने के मुख्य स्थल में से आप इन जगहो पर घुम सकते है त्रियुगीनारायण मंदिर जहाँ पर भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था ,पंच केदारो में से पहला केदारनाथ मंदिर जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है दूसरा तुंगनाथ पंच केदार में से एक है तुंगनाथ से 1 किलोमीटर की दुरी चंद्रशिला तक पहुँच सकते है और तुंगनाथ से पहले चोपता आपको देखने को मिल जाएगी और इस तरह से भी आप इन जगह पर घूमने का रुट प्लान बना सकते हो विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में आने के लिए सबसे पहले नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हरिद्वार जो क्रमशः 178 किमी व 201 किमी है और जोलीग्रांट एयरपोर्ट से 197 किमी दुरी पर स्थित है यहाँ पहुँच कर आपको गुप्तकाशी जाने के लिए टेक्सी ,कार व बाइक रेंट अन्य वाहनों की सुविधा भी मिल जाएगी और यहाँ पर घूमने के लिए आप कभी भी आ सकते हो लेकिन मानसून के दौरान थोड़ा सावधानी बरतनी पड़ सकती है और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 4331 फिट (1319 मीटर )है, रुकने की व्यवस्था भी आपको यहाँ पर मिल जाएगी
यहां कैसे पहुंचे
यहाँ पहुंचने के लिए सबसे पहले अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन या एयर पोर्ट पर पहुँच कर आपको ऋषिकेश पहुंचना रेलवे स्टेशन या हरिद्वार रेलवे स्टेशन भी पहुँच सकते हो और एयरपोर्ट जॉलीग्रांट पहुँच सकते है गुप्तकाशी से इन स्टेशंस की दुरी क्रमशः 178 किमी ,201 व जॉलीग्रांट की 194 किमी है यहाँ से गुप्तकाशी जाने के लिए टैक्सी अन्य वाहनों की सुविधा मिल जाएगी
यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम
यहाँ पर आप घूमने के लिए साल में कभी भी आ सकते है गुप्तकाशी का घूमने का सबसे अच्छा मौसम फरवरी और मार्च सितम्बर से नवंबर माना जाता है इन दिनों मौसम और भी खुसरत दिखाई देता है
समुद्र तल से ऊँचाई
इसकी ऊंचाई लगभग 1319 मीटर (4331 फिट) है