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त्रियुगीनारायण मंदिर

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जानकारी

भगवान विष्णु को समर्पित, त्रियुगीनारायण का मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। जग के नारायण भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर बेहद ही ख़ास माना जाता है। पौराणिक कथा अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह मंदिर के प्रांगढ़ में भगवान विष्णु की उपस्थिति में हुआ था। इसी के चलते काफी संख्या में युवा मंदिर में विवाह के लिए आते है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित इस मंदिर का राज्य सरकार द्वारा अब डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे और अधिक संख्या में लोग मंदिर में शादी करने आए। इससे स्थानीय लोगो के लिए रोजगार और राज्य में पर्यटन के अवसर को बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी।
 

श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सालभर खुला रहता है लेकिन सितम्बर से अप्रेल का समय यहाँ आने का सबसे उत्तम माना जाता है। करीब 6,500 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जहाँ पहुंचने के लिए आपको कुछ मार्ग पैदल चलकर तय करना होता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर को "त्रि युग" क्यों कहा जाता है?

उत्तराखंड में आपको भगवान विष्णु के विभिन्न मंदिर देखने को मिलते है लेकिन त्रियुगीनारायण मंदिर उन सबमे कुछ खास है। देहरादून से 252 किमी दूर यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है, जिसका निर्माण हिन्दू गुरु अदि शंकराचार्य जी द्वारा 8 वी शताब्दी के दौरान किया गया था। मंदिर की संरचना हूबहू केदारनाथ मंदिर जैसी प्रतीत होती है। पहाड़ो के बीच में स्थित मंदिर के चारो तरफ हरे भरे पहाड़ और दूर बर्फ से ढकी चोंटिया बेहद ही विहंगम नजारा प्रस्तुत करती है।
 

मंदिर में भगवान हरी की दो फ़ीट ऊँची प्रतिमा बेहद ही आकर्षक है, जिसको देखने मात्र से ही मन और आत्मा दोनों ही मंत्रमुग्ध हो जाते है। मंदिर प्रांगढ़ में चौकोर रूप में हवन कुंड इसका मुख्य केंद्र माना जाता है। कहा जाता है की इस कुंड की अग्नि को साक्षी मानकर भगवान शिव और पार्वती ने सात फेरे लिए थे।
 

साथ ही विद्वान् द्वारा यह भी बताया जाता है की इस कुंड में जलने वाली आग तीन युगो से जलती हुई आ रही है, जिस कारण मंदिर का नाम "त्रियुगी" पढ़ा। इसकी अखंड अग्नि से मंदिर अखंड धुनि के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसके हवन कुंड में अक्सर श्रद्धालु लकड़ी की आहुति देते है और कुंड से निकलने वाली राख को विवाहित जीवन के लिए वरदान माना जाता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा अनुसार माता पार्वती हिमावत की पुत्री थी, जो की माता सती का ही पुनर्जन्म थी। माता पार्वती को भगवान शिवा अति प्रिय थे, जिसके चलते वाह उन्हें अपनी खूबसूरती से मोहित करना चाहती थी। हालाँकि सफलता हाथ न लगने पर उन्होंने कठोर तप करने का निर्णय लिया। बताते है की माता पार्वती ने यहाँ से 5 किमी दूर गौरीकुंड में कई वर्षो तक शिव को पाने के लिए तप किया था, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने माता पार्वती के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था। कहा जाता है कि यह प्रस्ताव उन्होंने गुप्तकाशी के जिस स्थान पर किया था, वहां पर आज विश्वनाथ मंदिर स्थित है। त्रियुगीनारायण मंदिर आने वाले श्रद्धालु अक्सर माता पार्वती के आशीर्वाद हेतु गौरीकुंड स्थित माँ पार्वती के मंदिर में दर्शन करने जरूर से जाते है।

शिव और माँ पार्वती का विवाह स्थल

त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव और माँ पार्वती के विवाह स्थल के रूप में काफी प्रसिद्ध है। बताते है कि इस विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई रूप में विशेष भूमिक निभाई थी, तो वही ब्रह्मा जी पुजारी के रूप में उपस्थित थे। बताया जाता है की जिस स्थान पर शादी हुई थी उस स्थान को चिन्हित करने के तौर पर एक शिला रखी गई थी, जिसे लोग 'ब्रह्म शिला' के नाम से जानते है।

त्रियुगीनारायण मंदिर का पवित्र कुंड

त्रियुगीनारायण मंदिर के प्रांगढ़ में चार बेहद ही पवित्र कुंड स्थित है, जिन्हे रुद्रकुंड, विष्णु कुंड, ब्रह्म कुंड और सरस्वती कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि शादी से पहले सभी देवताओं ने इन्हीं कुंडों में स्नान किया था। तीनो ही कुंड अपनी एक विशेष पहचान लिए हुए है, रूद्र कुंड नहाने के लिए, विष्णु कुंड पवित्रता के लिए, ब्रह्म कुंड पीने के लिए और सरस्वती कुंड तर्पण के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं। कहते है सरस्वती कुंड से प्रवाहित होनी वाली धारा से रूद्रकुंड, विष्णु कुंड, और ब्रह्म कुंड में पानी एकत्रित होता है। बताया जाता है कि सरस्वती कुंड से निकलने वाला यह पानी भगवान विष्णु की नाभि से प्रवाहित होता है। लोगो में ऐसी भी धारण प्रचलित है की सरस्वती कुंड में निसंतान स्त्री के स्नान मात्र से संतान उत्पत्ति में हो रही बाधा दूर होती है।

डेस्टिनेशन वेडिंग

पिछले कुछ समय से त्रियुगीनारायण मंदिर युवाओ में डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में काफी प्रचलित हुआ है। भगवान शिव और माँ पार्वती का विवाह स्थल होने के चलते काफी संख्या में लोग यहाँ विवाह के बंधन में बंधने के लिए आते है। युवाओ के साथ शादी शुदा व्यक्ति भी यहाँ पुनः विवाह के लिए काफी संख्या में आते है। यहाँ शादी के लिए वर वधू के माता-पिता की अनुमति के साथ पंजीकरण आवश्यक है। मंदिर में शादी के लिए केवल सीमित संख्या में व्यक्तियों को ही शामिल होने की अनुमति होती है। विवाह के लिए पंजीकरण शुल्क के साथ अन्य शुल्क जमा करके जोड़े अपने विवाह की तिथि बुक करा सकते है। इसके लिए यहाँ विभिन वेडिंग प्लानर के साथ कई होटल भी शादी का पैकेज उपलब्ध करवाते है।

निवास की सुविधा

श्रद्धालु के साथ मंदिर में विवाह के लिए आए लोगो के लिए मंदिर के निकट रहने के विशेष इंतजाम उपलब्ध है। रहने के लिए यहाँ अपलो होटल और होमस्टे की सुविधा मिल जाती है, जो आपको सभी मुलभुत सुविधाए प्रदान करते है। इसके अतिरिक्त रहने की सुविधा आपको सोनप्रयाग में भी मिल जाती है।

खाने की व्यवस्था

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के चलते त्रियुगीनारायण मंदिर आए श्रद्धालुओं को यहाँ खाने की उचित व्यवस्था मिल जाती है। यहाँ उपलब्ध ढाबो और रेस्टोरेंट में स्थानीय व्यंजन के साथ अन्य व्यंजन का लुत्फ़ भी उठा सकते है।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • मंदिर के लिए सीधी परिवहन सेवा उपलब्ध न होने के चलते यात्री सोनप्रयाग से आगे का सफर टैक्सी के द्वारा कर सकते है।
  • ऋषिकेश एवं अन्य स्थानों से मिलने वाली बस सेवा केवल सोनप्रयाग तक चलती है।
  • बस और टैक्सी सुबह जल्दी प्रस्थान करती हैं, इसलिए निर्धारित स्टैंड पर सुबह जल्दी पहुंचे।
  • मानसून के दौरान यात्रा करने से बचे, इस दौरान आपको विभिन्न प्रकार की परेशानी हो सकती है।
  • यहाँ का मौसम साल भर ठंडा रहता है, इसलिए अपने साथ गर्म कपड़े अवश्य रखें।
  • अपने रहने की सुविधा पहले से कर लें।
  • अपने साथ जरूरी दवाई और उचित मात्रा में कैश अवश्य रखें।
  • विशेष दिनों के अतिरिक्त सप्ताहांत में यहाँ अत्यधिक भीड़ देखने को मिल सकती है।

नजदीकी आकर्षण

त्रियुगीनारायण मंदिर आए श्रद्धालु यहाँ के अन्य प्रसिद्ध स्थलों पर भी जा सकते है; जैसे

यहां कैसे पहुंचे

सड़क मार्ग से: - त्रियुगीनारायण मंदिर आने वाले श्रद्धालु यहाँ सड़क मार्ग का उपयोग करके आ सकते है। ऋषिकेश से त्रियुगीनारायण मंदिर लगभग 215 किमी की दूरी पर है। मंदिर में आप बस या टैक्सी की सेवा लेकर आ सकते है, हालाँकि यह सेवा आपको केवल सोनप्रयाग तक ही प्राप्त होती है, जो मंदिर के निकटतम प्रमुख बस स्टैंड है। सोनप्रयाग से त्रियुगीनारायण मंदिर मंदिर केवल 12 किमी की दूरी पर है, जिसे आप यहाँ उपलब्ध टैक्सी की सहायता से पूरी कर सकते है। सोनप्रयाग के लिए श्रद्धालुओं को बस और टैक्सी की सेवा ऋषिकेश के साथ देहरादून और हरिद्वार बस अड्डे से भी मिल जाती है। आरामदायक सफर के लिए आप कैब बुक करके भी यहाँ आ सकते है। बस और टैक्सी की सेवा बस स्टैंड से सुबह जल्दी प्रस्थान करती है, इसलिए यात्री निर्धारित बस स्टैंड पर जल्दी पहुंचे। 
 

रेल मार्ग से: - मंदिर के निकटतम रेलवे स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 216 किमी की दूरी पर है। स्टेशन से आगे की यात्रा आप यहाँ उपलब्ध बस और टैक्सी सेवा से पूरी कर सकते हैं। 
 

हवाई मार्ग से: - देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा इसके सबसे नजदीक है, जो करीब 231 किमी दूर है। हवाई अड्डे से मंदिर तक का सफर आप सड़क मार्ग से कर सकते है, जिसकी सेवाए आपको 16 किमी ऋषिकेश से मिल जाएंगी।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम

त्रियुगीनारायण मंदिर श्रद्धालुओं के लिए वर्ष भर खुला रहता है लेकिन यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय सितम्बर से नवंबर और फरवरी से मई का माना जाता है।

समुद्र तल से ऊँचाई

समुद्र तल से त्रियुगीनारायण मंदिर करीब 1,980 मीटर, लगभग 6,500 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।

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