हेमकुंड साहिब
सम्बन्धित वीडियो
जानकारी
सिख के पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक "श्री हेमकुंड साहिब" उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यहाँ स्थित गुरुद्वारा सिख के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है। यह गुरुद्वारा विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित सिख धार्मिक स्थल में से एक है। हर साल लाखो की संख्या में श्रद्धालु श्री हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा में शामिल होने आते है। यह यात्रा वर्ष में केवल छह माह ही संचालित रहती है। श्री हेमकुंड साहिब का नाम यहाँ स्थित झील के नाम पर रखा गया है, जिसका मतलब होता है बर्फ की झील। चारो तरफ बर्फीली पहाड़ो से घिरा यह गुरुद्वारा बेहद ही खूबसूरत और सुन्दर नज़ारे प्रस्तुत करता है, जो यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर देता है।
हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा खुलने और बंद होने की तिथि 2026
अत्यधिक बर्फ़बारी के चलते श्री हेमकुंड साहिब गुरूद्वारे के द्वार वर्ष में केवल छह माह ही खुले रहते है। प्रत्येक वर्ष मई माह में श्रद्धालुओं के लिए श्री हेमकुंड साहिब जी के द्वारा खोले जाते है और अक्टूबर माह में बंद कर दिए जाते है। वर्ष 2026 में श्रद्धालुओं के लिए श्री हेमकुंड साहिब जी के कपाट 23 मई 2026 को खोले जाएंगे। यात्रा के शुरुआती दिनों में मार्ग में कई फ़ीट ऊँची बर्फ जमा रहती है, जो मार्ग में अवरोध भी पैदा करती है। कपाट खुलने से पहले भारतीय सेना के साथ श्रद्धालु इस बर्फ को साफ करके मार्ग बनाने का कार्य करते है। निःस्वार्थ भाव से श्रद्धालुओं की इस सेवा को सिख धर्म में कार सेवा के नाम से जाना जाता है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी श्री हेमकुंड साहिब यात्रा पंजीकरण सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य है। इसे श्रद्धालु पूर्व की तरह ऑनलाइन या ऑफलाइन केंद्र से कर सकते है। वर्ष 2025 में हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा पर 2 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालु आए थे जो उनकी भक्ति और साहस का परिचय देता है।
सबसे ऊँचा सिख धार्मिक स्थल
समुद्र तल से 15 हजार फ़ीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब सिख धर्म का सबसे ऊंचाई पर मौजूद धार्मिक स्थल है। संस्कृत के दो शब्दों, हेम (जिसका अर्थ है बर्फ) और कुंड (जिसका अर्थ है कटोरा), से बना है हेमकुंड। हिमालय की गोद में बसा यह गुरुद्वारा बेहद ही आकर्षक और मनमोहित कर देने वाले दृश्य उत्पन्न करता है। वही यहाँ का शांत और गुरबानी मय वातावरण हर किसी को मोहित कर देता है। मान्यताओं और सिख धर्म के ग्रन्थ अनुसार इस स्थान पर सिख के दसवे गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की यह तपस्थली है, यहाँ उन्होंने हेमकुंड झील के निकट कई समय तक ध्यान लगाया था। दसवे गुरु से जुड़े होने के चलते सिख धर्म में इस स्थान की अधिक मान्यता है, जिसके चलते दूर-दूर से लाखो की तादाद में श्रद्धालु हर वर्ष यहाँ दर्शन करने आते है।
हेमकुंड झील
गुरूद्वारे के निकट हेमकुंड झील बेहद प्रमुख है। इस झील में स्नान करने के बाद ही श्रद्धालु गुरुद्वारे में दर्शन करने के लिए जाते हैं। बताते है की यह झील ही हिमगंगा नदी का उद्गम स्थल है, जिसके निकट बैठकर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने गहनता से ध्यान लगाया था, जिसका वर्णन सिख के दसम ग्रन्थ में भी उल्लेखित है। चारो तरफ बर्फीली पहाड़ियों से घिरी यह झील के नजारा देखने लायक होता है। गुरूद्वारे के निकट मौजूद इन बर्फीली पहाड़ियों पर निशान साहिब का चिन्ह मौजूद है। झील पर पड़ते गुरुद्वारे और बर्फीली पहाड़ियों के प्रतिबिम्ब बेहद ही लुभावने दिखाई पड़ते हैं।
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर
गुरूद्वारे और झील के निकट यहाँ पर लोकपाल लक्ष्मण मंदिर मौजूद है। यह मंदिर श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण को समर्पित है। गुरूद्वारे में मत्था टेकने के बाद श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने अवश्य से आते है। इस मंदिर के कपाट श्री हेमकुंड साहिब जी के साथ ही बंद और खोले जाते है।
रात्रि विश्राम
अन्य गुरूद्वारे के विपरीत श्री हेमकुंड साहिब आए श्रद्धालुओं को यहाँ रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं दी जाती। मत्था टेकने के बाद श्रद्धालु यहाँ से सीधा घांघरिया या गोविंदघाट के लिए प्रस्थान करते हैं। रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध न होने के चलते यात्री घांघरिया से सुबह जल्दी गुरूद्वारे के लिए प्रस्थान करते है, जिससे वह समय पर वापस विश्राम स्थल पर पहुँच सके।
निवास की सुविधा
हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को रहने के लिए गोविन्द घाट पर विभिन्न प्रकार के विकल्प मिल जाते है। श्रद्धालु अपनी आवश्यकतानुसार होटल, होम स्टे या गेस्ट हाउस बुक कर सकते हैं। इसके साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए गोविंदघाट स्थित गुरूद्वारे में निशुल्क रात्रि विश्राम की उचित सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त घांघरिया में भी यात्रियों के रहने के उचित विकल्प मौजूद है, जहाँ उन्हें होटल, होमस्टे और जीएमवीएन विश्राम स्थल की सुविधा मिल जाती है। गोविंदघाट के समान ही घांघरिया में भी श्रद्धालुओं को गुरूद्वारे में निशुल्क निवास की सुविधा मिल जाती है।
हेमकुंड हेली सर्विसेज
हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए श्रद्धालुओं के लिए हेली सेवा का भी संचालन किया जाता है। यह सेवा गोविंदघाट से घांघरिया तक के लिए दी जाती है। इस सुविधा के लिए श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को यात्रा पंजीकरण करते समय ही चुनाव करना होता है। यह हेली सेवा श्रद्धालु आईआरसीटीसी हेली यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट से बुक कर सकते हैं।
खाने की व्यवस्था
गोविंदघाट से शुरू होने वाला श्री हेमकुंड साहिब के मार्ग में आपको खाने की विशेष सुविधा मिलती है। यात्रा मार्ग के साथ-साथ इसके मुख्य पड़ाव जैसे पुलना और घांघरिया में खाने की विशेष प्रबंध है। यहाँ आपको ढाबे और रेस्टोरेंट दोनों की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त गुरूद्वारे में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की सुविधा भी निरंतर चलती रहती है। यहाँ आपको स्थानीय भोजन के साथ अन्य व्यंजनों का स्वाद भी चखने को मिलता है। हालाँकि ध्यान रहे यहाँ केवल शाकाहारी भोजन ही श्रद्धालुओं को परोसा जाता है।
हेमकुंड साहिब ट्रेक
समुद्र तल से 4 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब तक का सफर काफी कठिनाइयों भरा है। यहाँ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पुलना से 15 किमी का सफर पैदल चलकर पूरा करना होता है। गोविंदघाट से उपलब्ध हेली सेवा केवल घांघरिया तक ही उपलब्ध है जिसके आगे का सफर पैदल या यहाँ उपलब्ध घोड़े-खच्चर से ही पूरा करना होता है। घांघरिया से गुरुद्वारे तक 6 किमी का सफर बेहद ही मुश्किल और थका देने वाला होता है। घांघरिया इस मार्ग का अंतिम गांव है जहाँ आपको रहने और खाने की उचित सुविधा मिल जाती है। श्री हेमकुंड साहिब ट्रेक के दौरान यात्री अपने साथ जरुरी वस्तुए अवश्य से साथ में रखें, जैसे पानी, खाना और दवाई।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- यात्रा पंजीकरण सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य है।
- हेलीकाप्टर सेवा के लिए यात्रा पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से करें।
- हेली सेवा के स्लॉट सीमित होने के चलते इसकी बुकिंग पहले से कर लें।
- पहचान के लिए अपने साथ आईडी प्रूफ जरूर लेकर आए।
- बस और टैक्सी सेवा केवल गोविंदघाट तक ही मिलती है उसके आगे पुलना तक का सफर स्थानीय टैक्सी के द्वारा करना होगा।
- स्थानीय वातावरण के अनुकूल ढलने के लिए गोविंदघाट में विश्राम करके ही आगे बढ़ें।
- यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की जानकारी जरूर से प्राप्त कर लें।
- मानसून के दौरान यात्रा करने से बचे।
- गोविंदघाट में श्रद्धालुओं के लिए निजी पार्किंग की उचित सुविधा मिल जाती है, इसके अतिरिक्त गुरुद्वारा प्रबंधन भी पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाता है।
- अपने साथ आवश्यक वस्तुए जैसे की दवाई, गर्म कपडे, कॅश, रेनकोट, टॉर्च और अन्य जरूर से रखें।
नजदीकी आकर्षण
श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए श्रद्धालु यहाँ के अन्य प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर भी जा सकते है, जैसे:
यहां कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग से: - ऋषिकेश से श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा करीब 280 किमी की दूरी पर है। गोविंदघाट इसके निकटतम मोटर मार्ग में से है, जहाँ आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते है। इसके लिए आपको ऋषिकेश के साथ हरिद्वार और देहरादून से बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा करीब 20 किमी की दूरी पर है। गोविंदघाट से पुलना का सफर आप स्थानीय टैक्सी के द्वारा पूर्ण कर सकते है, जबकि उसके आगे की यात्रा आपको ट्रेक के द्वारा करनी होगी।
रेल मार्ग से: - इसके निकटतम रेलवे स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो गोविंदघाट से 266 किमी दूर है। स्टेशन से आगे की यात्रा आप सड़क मार्ग से कर सकते है।
हवाई मार्ग से: - इसके नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो गोविंदघाट से 277 किमी दूर है। एयरपोर्ट से आगे की यात्रा आप ऋषिकेश पहुंचकर कर सकते है जो एयरपोर्ट से 16 किमी दूर है।
हेली सेवा: गोविंदघाट से घांघरिया तक का सफर आप हेली सेवा के माध्यम से भी पूर्ण कर सकते है। इसके लिए आपको पहले से हेली सेवा का टिकट बुक करना होगा, जिसकी सुविधा आपको ऑनलाइन माध्यम से मिल जाती है।
यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम
अत्यधिक बर्फ़बारी के चलते श्री हेमकुंड साहिब जी के कपाट वर्ष में केवल छह माह ही खुले रहते है। इस दौरान यात्रा करने का सबसे अच्छा समय मई से जून तथा सितंबर से अक्टूबर माना जाता है।
समुद्र तल से ऊँचाई
श्री हेमकुंड साहिब जी समुद्र तल से 4,329 मीटर (14,202 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।