गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर
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जानकारी
उत्तराखंड के गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाला यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जहाँ श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते है। चमोली जिले का दिल कहे जाने वाले गोपेश्वर में स्थित इस मंदिर का वातावरण बेहद ही ख़ास है, जो भक्ति में लीन होने के लिए सहायक का काम करती है। पंच केदारो में से चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर की शीतकालीन गद्दी भी यही मंदिर है।
गोपीनाथ मंदिर
इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश द्वारा किया गया था, जो इस मंदिर की प्राचीनता को दर्शाता है। दिल्ली से गोपीनाथ मंदिर करीब 465 किमी की दूरी पर है, जो सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड परिवहन द्वारा रोजाना गोपेश्वर के लिए ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून से बस संचालित होती है। इसके अतिरिक्त आप यहाँ यूनियन द्वारा संचालित टैक्सी सेवा का लाभ लेकर भी पहुँच सकते है। मंदिर के गभगृह स्थित शिवलिंग स्वय्मभू बताया जाता है, जो अपने आप उत्पन्न हुआ है। भगवान शिव के अतिरिक्त आपको यहाँ अन्य भगवानो की मुर्तिया भी देखने को मिलती है, जैसे गणेश जी, हनुमान जी, माँ दुर्गा इत्यादि। मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा आप इसके प्रांगढ़ में मौजूद टूटी हुई भगवान की मूर्तियों से लगा सकते है।
भगवान शिव का त्रिशूल
गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर का विशेष पौराणिक महत्व है, जो इसके प्रांगढ़ में मौजूद त्रिशूल से पता चलता है। यह त्रिशूल मंदिर के मुख्य आकर्षणों में से एक है, जिसे देखने श्रद्धालु दूर-दूर से यहाँ आते है। कहते है जो त्रिशूल शिव ने कामदेव पर चलाया था वह यही त्रिशूल है जो मंदिर के प्रांगढ़ में आज भी मौजूद है। पुरातत्व विभाग द्वारा जाँच करने पर इस त्रिशूल के निर्माण में किस धातु का उपयोग हुआ है उसका पता नहीं चल सका। यह इसलिए भी खास है क्यूंकि इतने वर्षो से खुले प्रांगढ़ में ठण्ड और बारिश का इस त्रिशूल पर कोई असर नहीं पड़ता है। हालाँकि कुछ लोग मानते है कि त्रिशूल अष्ट धातु से बना हुआ है, जो इसे किसी भी मौसम में खराब होने से बचाता है।
गोपीनाथ मंदिर का इतिहास
पौराणिक कथा अनुसार जब भगवान शिव घोर तपस्या में लीन थे उस दौरान तीनो लोको में ताड़कासुर नाम के राक्षस ने कोहराम मचा रखा था। ताड़कासुर ने अपनी शक्तियों के बल से तीनों लोक पर कब्ज़ा कर लिया था। ताड़कासुर से पराजित सभी देवगण भगवान ब्रह्मा के पास सहायता मांगने पहुंचे। ब्रह्मा ने देवगणों को बताया कि इस राक्षस का वध केवल एक ही कर सकता है और वह है शिव का होने वाला पुत्र।
इसके लिए शिव की तपस्या को भंग करना होगा और उनका विवाह माँ पार्वती से संपन्न करवाना होगा। विवाह पश्चात उनसे उत्पन्न हुआ पुत्र ही ताड़कासुर का वध कर सकेगा।
इसके लिए सभी देवताओ ने भगवान शिव को उनकी तपस्या से जगाना चाहा लेकिन उन्हें कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई। अंत में थक हारकर स्वर्ग के राजा इंद्र देव ने प्यार के देवता कहे जाने वाले कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने के लिए बुलाया। काफी मशक्कत करने के बाद अंततः कामदेव ने शिव की तपस्या को भंग कर ही दिया।
तपस्या भंग होने से शिव इतने क्रोधित हो उठे की उन्होंने अपना त्रिशूल कामदेव की तरफ फेंक दिया। इस वार से कामदेव बच निकले लेकिन बाद में शिव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म को कर दिया।
रति कुंड
गोपीनाथ मंदिर के निकट मौजूद रति कुंड का भी अपना एक महत्व है। कहते है की इस कुंड में कामदेव की पत्नी रति मछली के रूप में विराजमान है। रति को भगवान शिव द्वारा यह आशीर्वाद मिला था की जो भी श्रद्धालु तुम्हारे कुंड से पानी लेकर उनके शिवलिंग का अभिषेक करेगा उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी।
निवास की सुविधा
गोपीनाथ मंदिर के निकट रहने के लिए सिमित संख्या में साधन मिल जाते है, जैसे की होटल, होमस्टे, रिसोर्ट और गेस्ट हाउस। इनमे से कुछ आपको ऑनलाइन बुकिंग की सेवा प्रदान करते है, जबकि अन्य अभी ऑफलाइन माध्यम से ही बुकिंग स्वीकारते है। इन्हें आप किफायती दामों में बुक कर सकते हैं, हालाँकि चार धाम यात्रा के समय इनके शुल्क बढ़ जाते हैं। आप निम्नलिखित विकल्पों में से अपने रहने के लिए देख सकते है; जैसे:
- देव दर्शन होटल एंड कॉटेज
- आस्था गेस्ट हाउस
- होटल अन्नपूर्णा
- शिवम् होमस्टे
- सुदामा कॉटेज
- जय गुरुदेव गेस्ट हाउस।
खाने की व्यवस्था
मंदिर के निकट श्रद्धालुओं को विभिन्न प्रकार के होटल और ढाबे मिल जाते है, जहाँ वे स्थानीय और अन्य व्यंजन का स्वाद ले सकते है।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- मानसून के दौरान यात्रा करने से बचें, अन्यथा विभिन्न तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- गर्मियों के दौरान यहाँ का तापमान ठंडा रहता है, इसलिए अपने साथ गर्म कपड़े रखें।
- गंतव्य तक जाने वाली बस स्टेशन से सुबह जल्दी निकलती है, इसलिए समय से पहले पहुंचे।
- चार धाम यात्रा के समय मार्ग में आपको अत्यधिक जाम का सामना करना पड़ सकता है।
- मंदिर के गर्भगृह में फोटो खींचना और वीडियो बनाने की मनाही है।
नजदीकी आकर्षण
गोपीनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालु यहाँ के अन्य प्रसिद्ध स्थलों में भी जा सकते है; जैसे:
- कल्पेश्वर मंदिर।
- अनसूया माता मंदिर।
- रुद्रनाथ मंदिर।
यहां कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग से: - ऋषिकेश से गोपीनाथ मंदिर करीब 205 किमी की दूरी पर है, जहाँ आप सड़क मार्ग से आ सकते है। इसके लिए आपको बस और टैक्सी की सुविधा ऋषिकेश बस स्टैंड से मिल जाएगी।
रेल मार्ग से: - निकटतम रेलवे स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो की 206 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से रोजान सिमित संख्या में ट्रैन यहाँ आगमन करती है। यहाँ से आगे की यात्रा श्रद्धालु सड़क मार्ग से बस और टैक्सी से कर सकते हैं।
हवाई मार्ग से: - नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो मंदिर से 221 किमी दूर है। यह एयरपोर्ट प्रमुख शहरो से सीधी हवाई सेवा से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से मंदिर की यात्रा आप ऋषिकेश से शुरू कर सकते है, जो यहाँ से 16 किमी की दूरी पर है।
यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम
गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में जाने का सबसे अच्छे समय मार्च से मई और सितम्बर से दिसंबर का माना जाता है।
समुद्र तल से ऊँचाई
समुद्र तल से गोपीनाथ मंदिर 1,550 मीटर, लगभग 5,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।