गंगोत्री मंदिर
जानकारी
माँ गंगा को समर्पित गंगोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में स्थित है। भागीरथी नदी के निकट स्थित यह मंदिर माँ गंगा की उद्गमी स्थल भी है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी स्थान पर राजा भागीरथ ने माँ गंगा के धरती पर अवतरण के लिए कई वर्षो तक कठोर तप किया था। सड़क मार्ग से कुछ ही दूरी पर स्थित इस मंदिर में काफी संख्या में भक्त माँ का आशीर्वाद लेने पधारते है।
श्रद्धालुओं के साथ गंगोत्री धाम प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग प्रेमी को भी आकर्षित करती है। गौमुख - तपोवन ट्रेक के लिए हर वर्ष काफी लोग यहाँ पधारते है। बताते है की अवतरण के समय जिस स्थान पर माँ गंगा की पहली धारा धरती पर पड़ी थी वह मंदिर से 19 किमी की दूरी पर है, जिसे गौमुख के नाम से जाना जाता है। चार धाम यात्रा पर श्रद्धालु अक्सर भागीरथी से जल लेकर केदारनाथ धाम में जाकर भोले बाबा पर चढ़ाते है। समुद्र तल से 3,400 मीटर की अधिक ऊंचाई पर स्थित मंदिर बर्फ से ढकी पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
गंगोत्री धाम - चार धाम यात्रा का दूसरा पड़ाव
यमुनोत्री धाम से शुरू होने वाली उत्तराखंड की पवित्र चार धाम यात्रा का दूसरा और महत्वपूर्ण पड़ाव है गंगोत्री धाम। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यह मंदिर माँ गंगा का उद्गम स्थल भी कहलाता है। चारो तरफ बर्फीले पहाड़ो से घिरा गंगोत्री धाम का मंदिर अत्यंत ही मनमोहक लगता है, जिसकी ऊंचाई करीब 20 फ़ीट है। सफ़ेद ग्रेनाइट से निर्मित मंदिर की खूबसूरती को देखकर हर कोई कायल हो जाता है। आँखों को लुभाने वाली मंदिर की खूबसूरती और मन को मोह लेने वाला यहाँ का वातावरण श्रद्धालु के साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। मंदिर की दिव्यता और पवित्रता अतुलनीय है, शायद इसी वजह से लाखो की संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन करने हेतु पधारते है।
गंगोत्री धाम का इतिहास
गंगोत्री धाम का इतिहास करीब 1200 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर का निर्माण नेपाल के जनरल अमर सिंह थापा द्वारा किया गया बताया जाता है, जिसका पुनः निर्माण 19वीं शताब्दी में किया गया था। यही के समय में गंगोत्री धाम सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है, जहाँ आप मोटर गाडी की सहायता से यहाँ आसानी से पहुँच सकते है। लेकिन पहले के समय में सड़क मार्ग न होने के चलते गंगोत्री धाम तक श्रद्धालु पैदल यात्रा करके पहुंचते थे। 1980 में सड़क मार्ग बन जाने के बाद से इसकी यात्रा सुगम बन गई। आज के समय में देहरादून से गंगोत्री धाम की 237 किमी की यात्रा तय करने में करीब 9 घंटे का समय लगता है।
गंगोत्री धाम कपाट खुलने की तारीख 2026
गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया के अवसर पर खोले जाते है। इस वर्ष भक्तो के लिए कपाट 19 अप्रैल 2026 खोले जाएंगे। कपाट खोले जाने के दिन माँ की डोली को उनकी शीतकालीन गद्दी मुखबा से पूरे धूम धाम से लाया जाता है। चार धाम यात्रा पर आए भक्तो के लिए माँ के द्वारा अगले छह माह तक खुलें रहते है और भाई दूज के दिन इसे बंद कर दिया जाता है। मंदिर में पूजा पाठ की जिम्मेदारी मुखबा गांव के ही सेमवाल पंडितो को सौंपी गई है।
गंगोत्री धाम की महत्वता
पौराणिक कथा अनुसार राजा भागीरथी के पूर्वजो के पापो को धोने हेतु माँ गंगा धरती में अवतरित हुई थी, जिसके लिए भागीरथी ने कठोर तप किया था।
इसके चलते माँ गंगा को पापो को धोने वाली पावन नदी के रूप में सम्बोधित किया जाता है और तब से लेकर आज तक माँ गंगा को मानव जाती की पवित्रता का स्रोत माना जाता रहा है। बताते है की जिस स्थान पर राजा भागीरथी ने माँ गंगा की अवतरण के लिए तप किया था वह स्थान मंदिर के निकट स्थित है।
मंदिर की महत्ता पांडव काल से भी जुडी बताई जाती है। पौराणिक कथा अनुसार, महाभारत के युद्ध के पश्चात सभी पांडव युद्ध में मारे गए परिवार जानो की मृत्यु के पाप के प्रायश्चित हेतु इस स्थान पर देव यजना करने के लिए आये थे।
कहते है की भागीरथी नदी में पितृ संस्कार करने से पूर्वजो की आत्मा पुनः जन्म के चक्र से मुक्त हो जाती है। इस नदी में डुबकी मात्र से ही भूतकाल से वर्तमान तक के सभी पाप नष्ट हो जाते है।
मौसम
बर्फीली पहाड़ियों से घिरा रहने वाले गंगोत्री धाम में वर्ष भर मौसम ठंडा रहता है। गर्मी के दिनों में सुबह और रात के समय यहाँ का मौसम काफी ठंडा होता है।
गंगोत्री धाम में होटल्स की सुविधा
श्रद्धालुओं के लिए गंगोत्री धाम में ठहरने के लिए काफी अच्छी व्यवस्था है। यहाँ आपको रात्रि विश्राम के लिए होटल, होमस्टे के साथ गेस्ट हाउस की भी सुविधा मिल जाती है।
खाने की व्यवस्था
गंगोत्री धाम आए श्रद्धालुओं को यहाँ खाने की काफी अच्छी सुविधा मिल जाती है। यहाँ आपको विभिन्न प्रकार के रेस्टोरेंट और ढाबे मिल जाते है, जो आपको कई तरह के व्यंजन उपलब्ध करवाते है।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- चार धाम यात्रा पंजीकरण सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य है।
- निर्धारित यात्रा तिथि से करीब दो से तीन सप्ताह पहले अपना पंजीकरण अवश्य कर लें।
- मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा के लिए प्रस्थान करें।
- मानसून के दौरान यात्रा करने से बचें, इस दौरान आपको भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
- अपने साथ उचित मात्रा में गर्म कपडे लेकर चलें।
- उच्च रक्तचाप, शुगर, और अन्य बीमारी से ग्रसित व्यक्ति डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही यात्रा करें।
- उचित मात्रा में रूपये, जरुरी दवाई, और दस्तावेज साथ में रखें।
- अपने रहने की व्यवस्था पहले से कर लें।
- अपने साथ छाता या रेनकोट अवश्य से रखें।
- बस और टैक्सी अपने निर्धारित स्टैंड से सुबह जल्दी निकलती है, इसलिए समय से पहले पहुंचे।
नजदीकी आकर्षण
गंगोत्री धाम आए श्रद्धालु यहाँ के अन्य प्रसिद्ध और धार्मिक स्थलों में जाकर अपनी यात्रा को और अधिक यादगार बना सकते है; जैसे
- गौमुख
- पांडव गुफा
- जलमग्न शिवलिंग
- तपोवन
- केदारताल
- भैरोंघाटी
- गरतांग गली
- काशी विश्वनाथ मंदिर
- मुखबा
यहां कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग से: - गंगोत्री धाम आप सड़क मार्ग का उपयोग करके आ सकते है। दिल्ली से गंगोत्री धाम की दूरी करीब 520 किमी की है। मंदिर के निकटतम मुख्य शहर देहरादून और ऋषिकेश है जो की सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़े हुए है। इसके लिए आपको सबसे पहले देहरादून या ऋषिकेश आना होगा। यहाँ से आगे की यात्रा आप बस या टैक्सी से पूरी कर सकते है, जिसकी सुविधा आपको देहरादून, ऋषिकेश के साथ हरिद्वार से भी मिल जाती है। चार धाम यात्रा के दौरान इस मार्ग पर सरकार द्वारा विशेष बसों का भी संचालन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आप कैब बुक करके इस यात्रा को पूर्ण कर सकते है।
रेल मार्ग से: - देहरादून रेलवे स्टेशन मंदिर के सबसे निकटतम स्टेशन में से एक है, जो 243 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से रोजाना कई ट्रैन देहरादून के लिए संचालित होती है। स्टेशन से आगे की यात्रा आप सड़क मार्ग से कर सकते है। इसके लिए आपको बस की सुविधा स्टेशन के नजदीक स्थित देहरादून पर्वतीय बस डिपो से मिल जाएगी।
हवाई मार्ग से: - मंदिर के निकटतम हवाई देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो करीब 265 की दूरी पर है। हवाई अड्डे से आगे की यात्रा आप ऋषिकेश से पूरी कर सकते है, जो की यहाँ से 16 किमी की दूरी पर है। ऋषिकेश से आपको गंगोत्री के लिए बस और टैक्सी की उचित सेवा मिल जाती है। इसके अतिरिक्त आपको ऋषिकेश में रहने और चार धाम यात्रा का ऑफलाइन पजीकरण केंद्र भी मिल जाते है।
यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम
गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए वर्ष में केवल छह माह ही खुले रहते है, इनमे से यहाँ आने का सबसे बेहत समय अप्रैल से जून तथा सितम्बर से अक्टूबर का माना जाता है।
समुद्र तल से ऊँचाई
समुद्र तल से गंगोत्री धाम करीब 3,415 मीटर, लगभग 11,204 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।